सोमवार, 26 सितंबर 2016

टिकाऊ विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals)

आज यून महासभा को संबोधित करते हुए हमारी विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने अपने भाषण के पहले हिस्से में टिकाऊ विकास एजेंडे का जिक्र किया.. तो क्या हैं ये टिकाऊ विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals)..??
25 सितंबर 2015 को संयुक्त राष्ट्र संघ में देशों ने एक नए टिकाऊ विकास एजेंडा के हिस्से के रूप में गरीबी समाप्त करने के लिए, हमारे ग्रह की रक्षा करने और सभी के लिए समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लक्ष्यों के एक समूह को अपनाया। प्रत्येक लक्ष्य का एक विशिष्ट उद्देश्य है जिसे अगले 15 बरसों में हासिल किया जाना है।
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हममें से हर एक को इस मुहिम का हिस्सा बनने की जरूरत है, फिर वो चाहे सरकारें हों, निजी क्षेत्र हो या सिविल सोसाइटी या फिर हम आप।
इसमें शामिल होने की पहली शर्त इस विचार, उद्देश्य और इसके लक्ष्यों को हर एक व्यक्ति तक पहुंचाना है। हम इसमें अपने दैनिक जीवन में थोड़े से बदलाव करके योगदान कर सकते हैं। कमाल की बात यह है कि हमारा योगदान हमें तय करना है। ये उतना ही जरूरी है जितना कि हमारे अपने बच्चे..क्योंकि ये सारी कवायद सिर्फ इसलिए है जिससे कि हमारे नौनिहालों को और आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर समाज, देश व दुनिया मिल सके।
ध्यान रहे कि सिर्फ हमें अपने हिस्से का योगदान देना है और दूसरों को उनके योगदान की जिम्मेदारी का सविनय ध्यान दिलाना है।
कुल मिला कर 17 लक्ष्यों का निर्धारण हुआ है, जो प्राथमिकता के आधार पर निम्म क्रम में हैं -
1. शून्य गरीबी
2. शून्य भुखमरी
3. अच्छा स्वास्थ्य व जन कल्याण
4. गुणवत्तापरक शिक्षा
5. लैंगिक समानता
6. स्वच्छ पानी व स्वच्छता
7. किफायती व स्वच्छ ऊर्जा
8. समुचित कार्य व आर्थिक प्रगति
9. उद्योग, नवाचार व बुनियादी ढ़ांचा
10. असमानता में सतत कमी
11. टिकाऊ शहर व समुदाय
12. उत्तरदायी खपत और उत्पादन
13. जयवायु संबंधी कार्रवाई
14. जल के भीतर जीवन
15. जमीन पर जीवन
16. शांति, न्याय व मजबूत संस्थान
17. इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए साझीदारी
अगली ब्लॉग पोस्ट में हम चर्चा करेंगे कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हम व्यक्तिगत तौर पर क्या योगदान कर सकते हैं?

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